जय भारत बोला... दुसरका भाग

Rangoli
हुलसै ला पगवा पखार हो लहरिया क हार ले ले सगरा॥
हिमकर हास दसन द्युति उडुगन,
मलयज बाजै सितार हो लहरिया क हार ले ले सगरा ।
सुर मणि मौलि मुकुट धवलागिरि
किंकिणि गंगा विहार हो लहरिया क हार ले ले सगरा ।
नरमद सिन्धु ललित अलकावलि
बिन्दी तिलक घनसार हो लहरिया क हार ले ले सगरा ।
द्राविण बंग तमिल अरु उत्कल
केरल चिरिया कै तार हो लहरिया क हार ले ले सगरा ।
* * *

सखि अग जग मन चोरवा हो मोर भारत देशवा ।
गौतम गाँधी कै सजल सपनवाँ
राना, सिवा, लछिमीबाई क प्रनवाँ,
नख शिख सुभग पोर-पोरवा हो मोर भारत देशवा ।
भगत, अजाद, तिलक, चितरंजन
इनिरा, जवाहिर कै नयना क अंजन,
नाचै निरखि मन मोरवा हो, मोर भारत देशवा ।
* * *

बाबूजी कऽ एगो कविता प्रस्तुत बा। ई हऽ दुसरी कड़ी। पहिली इहाँ पढ़ीं जा। जइसे-तइसे भोजपुरी लिख के गावै-बजावै वालन से अलग भोजपुरी, साहित्यिक संसकार में पगल भोजपुरी लिखे के हिमायती हउअँ हमार बाबूजी। आपन स्कूल खातिर बहुत लिखलन, ओही डायरी में लिखल कवितन में से इहाँ प्रस्तुत करत हईं। हमके तऽ एतने भोजपुरी लिखे में बहुते प्रयास करे के पड़ल हऽ, पूरा औघड़ हईं हम तऽ -
इन्नरपुर मदमथनी हमरी केसर कुंकुम नगरी
मोर कसमिरवा जागी ना ।
जननी माथै कै सिन्दुरवा, मोर कसमिरवा जागी ना ॥

कस्तूरी हिरनवाँ फनिहैं अम्बर ब्योम वितनवाँ
मोर कसमिरवा जागी ना ।
कवि गुरु कालीदास परनवाँ मोर कसमिरवा जागी ना ॥

जागी राजस्थनवाँ जागी कैकय सिन्धु सिवनवाँ
मोर कसमिरवा जागी ना ।
जागी सउँसै हिन्दुस्तनवाँ मोर कसमिरवा जागी ना ॥
* * *

जय भारत बोला सुगन मयना ।
जय भारत बोला सुगन मयना ॥

इहवाँ बदे तरसै इन्नर की नगरी
सपनों में तजबै न इहवाँ की डगरी ,
अब ’पंकिल’ खोला अलस नयना -
जय भारत बोला सुगन मयना॥

Comments

  1. वारे हिमांसु भैया ,
    ... अब तौ हमैं तू अकवारी मा लै लिहे अहौ ...
    यहिकै मतलब तौ ठीक से समझत हौ न !

    तम्पलेट तौ अस चुने अहौ कि मन कहत अहै कि झापड़ मारि के
    छोरि ली !
    .
    कलकत्ता से रस्मी जी २००७ से लिखति अहैं ... बूडि मरा हो सब !
    डंडा न किहे होइत तौ सोवत रहतेव ! भला जागेउ तौ !
    उम्मीद अहै नीक अउर मनोयोग से लिखबो ... है न ! नाहीं तौ हम
    तौ हइयइ हन ! तुहैं सुकून से बैठै थोरय दियब ! बस 'समर्पित ब्लागर'(?) न
    बनै लागेउ ... हाँ नाहीं तौ ... सब धन धनिया गुड़ गोबर कै देबौ ! ... समझे रहेउ !!!!!!!!!
    .
    ( पिछली प्रविष्टि पै )
    सुरुआत मा तौ लाग कि भोजपुरी - विद्यापति का पढित अहै ..
    ई लाइन तौ गजबै है भाई ,
    '' बरसै बँसुरिया की अमिरित धार हो, विहँग आवा उड़ि चलीं ॥ ''
    बासुरी के आवाज पै कल्पना कै उड़ान बिहँग के नाईं ! .... जरा आवैं तौ काब्य-सुडूकू-साधक
    अउर देखैं कि सहजता के यक पंक्ति मा उनकै महीनन कै मेहनत केस हेराय जाति अहै !
    @ सिंह हिरन सँगवा करैं जलपान रे..
    --------- '' कहलाने एकत बसत अहि मयूर मृग बाघ '' , याद आवै लाग !
    भुइं से जुड़ा एतना ज्यादा माहौल बना है अंतिम वाले गीत मा कि बड़े - बड़ेन कै
    कविताई के माथे पै पसीना आइ जाइ ! जौने दिन देस-भासा आगे आइ जाये , सहजता
    कै भरमार होय जाये !
    राम करैं ऊ दिन यथाशीघ्र आवै !!!
    .......................................................................................................................................
    अब यहि वाली पै ---
    @ लहरिया क हार ले ले सगरा
    @ हो मोर भारत देशवा
    @ मोर कसमिरवा जागी ना
    ............ कास केहू इन गीतन का आपन कंठ दै दियत ! कौनौ जरूरी नाय न कि
    कंठ - कोकिला होये तबै काम चले , मंद-सप्तक मा तुहूँ गाय सकत हौ भाय !
    मुला कुछ करौ अब !
    २० खड़ी बोली कै चिरकुट ब्लाग पढे से लाख गुना अच्छा अहै कि यक देसज , सुधरा अउर
    रचा-पगा ब्लॉग पढ़ा जाय जहाँ साहित्य उतर आवै !
    अगर इन गीतन का कंठ मिलि जाये तौ समझौ कि ब्रह्मानंद-सहोदर यहि ब्लॉग पै हाजिर !!!
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  2. जितना समझ पा रहे हैं, पढ़ रहे हैं.

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  3. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,
    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,
    कलम के पुजारी अगर सो गये तो
    ये धन के पुजारी
    वतन बेंच देगें।



    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में प्रोफेशन से मिशन की ओर बढ़ता "जनोक्ति परिवार "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ ,

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आप सब के बोलावल-दुलरावल आ कुछ कहल एह सलोन भोजपुरिया के मन के हुलास देहल करी। आप आईं, बतियाईँ आ समझाईं। बाउर लिखवइया के लिखाई के सजावे खातिर आप सब के नीक-नेउर प्रोत्साहन बहुते जरूरी बा। हम राह देखब। पहिलहीं आभार।